दृष्टिहीन होने के बावजूद 26 वर्षीय श्रीकांत ने नहीं मानी हार, अपनी सोच और मेहनत से आज है 150 करोड़ की कंपनी के CEO – जाने क्या है कामयाबी के सूत्र


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अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए सभी को कई प्रकार की बाधाओं का सामना करना पड़ता है। अधिकतर लोग बाधाओं से हार जाते हैं, लक्ष्य तक पहुंच नहीं पाते हैं और जीवनभर दुखी रहते हैं। लेकिन कुछ लोग बाधाओं का डटकर सामना करते हैं और अपना लक्ष्य हासिल कर लेते हैं। लक्ष्य कैस हासिल किया जाए ये हैदराबाद के श्रीकांत बोला से सीखा जा सकता है। श्रीकांत दृष्टिहीन हैं और उनका जन्म एक गरीब परिवार में हुआ। आज अपनी कड़ी मेहनत के बल पर 26 साल के श्रीकांत ने करीब 150 करोड़ की कंपनी खड़ी कर दी है। उनकी कंज्यूमर फूड पैकेजिंग कंपनी बौलेंट इंडस्ट्रीज के 7 प्लांट है, जिसमें 1200 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं, इनमें से ज्यादातर दिव्यांग हैं।

ये हैं श्रीकांत बोला की कामयाबी के सूत्र

जब श्रीकांत से कामयाबी के बारे में पूछा जाता है तो वे बताते हैं कि उन्हें क्लास में भी सबसे पीछे बैठाया जाता था, इसलिए नहीं कि वे क्लास सबसे लंबे थे, बल्कि इसलिए क्योंकि वे देख नहीं सकते थे। उनके टीचर्स को लगता था कि वे कुछ कर नहीं पाएंगे।

ऐसी विपरीत स्थितियों में उन्होंने 5 सूत्रों को अपनाया…

1. श्रीकांत बोला कहते हैं- ‘मैं तब भी कहता था, आज भी कहता हूं, मैं सबकुछ कर सकता हूं।’ उन्होंने खुद को कभी भी कमजोर नहीं समझा और ये साबित कर दिया कि वे जो चाहते हैं वो कर सकते हैं। हमें भी खुद को कमजोर नहीं समझना चाहिए।
2. अगर आपको अपनी जिंदगी की जंग जीतनी है तो बुरे समय में धैर्य बनाकर रखना चाहिए। अधिकतर लोग बुरे समय में धैर्य खो देते हैं और गलत फैसले कर लेते हैं। श्रीकांत बोला ने धैर्य का साथ कभी नहीं छोड़ा और धीरे-धीरे वे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते गए।
3. श्रीकांत बचपन से ही पढ़ने में तेज थे और वे साइंस पढ़ना चाहते थे, लेकिन दृष्टिहीन होने की वजह से उन्हें कहीं भी साइंस पढ़ने की परमिशन नहीं मिली। कई महीनों की कोशिशों के बाद कोर्ट की मदद से उन्हें साइंस पढ़ने की इजाजत मिल ही गई। हमें भी लगातार कोशिश करते रहना चाहिए। इस बात का ध्यान रखेंगे तो एक दिन हम भी सफल हो सकते हैं।
4. श्रीकांत ने लोगों की नकारात्मक बातों को खुद पर हावी नहीं होने दिया और हमेशा सकारात्मक सोच के साथ मेहनत करते रहे। इसी का नतीजा है कि आज वे एक कामयाब इंसान हैं।
5. श्रीकांत ने अपने लक्ष्य पूरे करने के लिए कड़ी मेहनत की। 11वीं क्लास में साइंस में एडमिशन लेना बिल्कुल भी आसान नहीं था, जब एडमिशन मिल गया तो टीचर ने पूरे नोट्स के ऑडियो रिकार्ड कर उन्हें दिए। टीचर के साथ श्रीकांत की कड़ी मेहनत से परिक्षा में उन्हें 98% अंक प्राप्त हुए। हमें भी मेहनत में कभी पीछे नहीं रहना चाहिए।

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