पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड डाइंग व इलैक्ट्रोप्लेटिंग का जहरीला पानी रोकने में फेल


लुधियाना – पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड (पी.पी.सी.बी.) डाइंग व इलैक्ट्रोप्लेटिंग का जहरीला पानी रोकने में पूरी तरह फेल हो गया है। डाइंग इंडस्ट्री ने अंडरग्राऊंड पाइप डालकर कैमीकल युक्त जहरीला पानी बुड्ढे नाले में फैंकना जारी रखा हुआ है। इलैक्ट्रोप्लेटिंग इंडस्ट्री भी हैवी मैटल्स से भरे पानी को सीवरेज के जरिए बुड्ढे नाले में फैंक रही है। यह प्रदूषण इतने खतरनाक स्तर तक बढ़ चुका है कि पी.पी.सी.बी. के अफसरों को खुद समझ नहीं आ रहा कि इसे कैसे खत्म किया जाए। पी.पी.सी.बी. के अफसरों की नालायकी के कारण पिछले 10 सालों से डाइंग इंडस्ट्री के कॉमन एफुलैंट ट्रीटमैंट प्लांट (सी.ई.टी.पी.) नहीं लग सके। वजह, उन्हें आज तक समझ में नहीं आया कि सी.ई.टी.पी. लगाने के लिए सही योजना क्या होनी चाहिए। यानी मिस मैनेजमैंट के चलते डाइंग इंडस्ट्री के 40 करोड़ रुपए से ज्यादा अफसरों ने खराब करवा दिए। पी.पी.सी.बी. के अफसर अपनी मर्जी से ही डाइंग इंडस्ट्री से केंद्र की गलत स्कीमों में सी.ई.टी.पी. की सबसिडी लेने के लिए अप्लाई करवाते गए और केंद्र से आवेदन रद्द होते गए।

पी.पी.सी.बी. के अफसर भी हर बार नए सिरे से डाइंग इंडस्ट्री को आवेदन करने के लिए दबाव बनाते रहे। बिना ग्राऊंड रिएलिटी जाने पी.पी.सी.बी. ने सन् 2009 में पंजाब डायर्स एसोसिएशन का गठन करवा दिया। एसोसिएशन ने बहादुरके रोड, ताजपुर रोड, राहों रोड और फोकल प्वाइंट की करीब 280 डाइंगों के लिए 117 एम.एल.डी. (मिलियन लीटर डेली) का प्लांट लगभग 575 करोड़ रुपए में बनाने के लिए डिटेल प्रोजैक्ट रिपोर्ट आई.एल.एफ.एस. कंपनी से तैयार करवा दी। केंद्र ने इस रिपोर्ट को यह कह कर रिजैक्ट कर दिया कि कभी भी सी.ई.टी.पी. इतनी बड़ी संख्या में नहीं लगाए जाते इसलिए इन्हें छोटे-छोटे हिस्सों में लगाया जाए। बस, यहां से हिस्सों का खेल शुरू हुआ और आज तक सी.ई.टी.पी. हिस्सों में ही है। योजनाएं बनती जा रही हैं और रद्द होती जा रही हैं। बोर्ड के अधिकारी काम करने के झूठे एफीडेविट देकर अदालत को भी करते हैं गुमराह जब अदालत का दबाव आता है तो पी.पी.सी.बी. के अफसर काम करने के झूठे एफीडेविट देकर अदालत को भी गुमराह करते हैं। ग्राऊंड पर इंडस्ट्रीयल प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति पर पहुंच गया है।

पी.पी.सी.बी. ने अदालत में कहा था कि डाइंग व इलैक्ट्रोप्लेटिंग इंडस्ट्री के लिए कॉमन एफुलैंट ट्रीटमैंट प्लांट (सी.ई.टी.पी.) लगाए जा रहे हैं। जबकि सिर्फ इलैक्ट्रोप्लेटिंग इंडस्ट्री का प्लांट ही लगाया गया वह भी इंडस्ट्री ने प्राइवेट कांट्रैक्टर के साथ मिलकर फोकल प्वाइंट में लगाया। शहर में बहुत-सी ऐसी इलैक्ट्रोप्लेटिंग और डाइंग इंडस्ट्री हैं जो अंडरग्राऊंड पाइप डालकर सीवरेज के जरिए बुड्ढे नाले में पानी फैंक रही हैं। दिखावे के लिए कांट्रैक्टर कंपनी जे.बी.आर. को नाममात्र ही पानी उठवाती है।

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