पंजाब, हिमाचल, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के यात्रियों के लिए ‘खतरा’


जैसे ही रेलगाड़ी स्टेशन पर पहुंचती है, आदत के अनुसार यात्रियों की इ‘छा पहले उतरने की होती है। स्टेशन पर पहुंचने से पहले जैसे ही रेलगाड़ी की रफ्तार धीमी होती है तो यात्री उठकर रेल डिब्बे के दरवाजे के पास खड़े हो जाते हैं। यात्रियों की इसी आदत का फायदा जेबकतरों द्वारा उनकी जेब काटने और स्नैचिंग द्वारा उठाया जाता है। दिल्ली पुलिस के अनुसार इन दिनों सबसे ’यादा स्नैचिंग के केस दिल्ली आने वाले यात्रियों के साथ हो रहे हैं। ये सब यात्रियों में जागरूकता की कमी के कारण हो रहा है। उल्लेखनीय है कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से रोजाना सैंकड़ों गाडिय़ां दिल्ली पहुंचती हैं और जल्दी उतरने के चक्कर में इन गाडिय़ों में सवार यात्री जेबकतरों और स्नैचरों के शिकार हो रहे हैं।

2 बातों का लाभ उठाते स्नैचर
अतिरिक्त कमिश्नर पुलिस (रेलवे) ने बताया कि रेलवे स्टेशन के आसपास स्लम एरिया में रहने वाले स्नैचर इस बात से वाकिफ हैं कि जब भी कोई ट्रेन दिल्ली पहुंचती है तो प्लेटफार्म पर जगह नहीं होने व तीखे मोड़ के कारण रेलगाडिय़ों की रफ्तार धीमी हो जाती है और वे इन 2 बातों का लाभ उठाते हुए गाडिय़ों में चढ़ जाते हैं। अपनी आदत अनुसार जैसे ही यात्री जल्द ट्रेन से उतरने की कोशिश करते हैं तो वे उन्हें निशाना बना लेते हैं और दूसरे वे लोग स्नैचरों का निशाना बनते हैं जो गाड़ी से उतरते समय मोबाइल पर बात करने में मग्न होते हैं। दयाल बस्ती ऐसा ही एक स्लम एरिया है जो सराय रोहिल्ला पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आता है। इस बस्ती में रहने वाले छोटी उम्र के लड़के इन दिनों दिल्ली-जयपुर सैक्शन में सक्रिय हैं। इसी तरह पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से दिल्ली पहुंचने वाली गाडिय़ों के यात्रियों को सब्जी मंडी के पास शिकार बनाया जाता है। इनके अतिरिक्त बाड़ापुल, लोहापुल, शिवाजी ब्रिज, तिलक ब्रिज, गाजियाबाद सैक्शन में शाहदरा और दिल्ली-फरीदाबाद सैक्शन ओखला, तुगलकाबाद एरिया स्नैचिंग के लिए मशहूर हैं।

सब कुछ देख भी चुप रहते हैं यात्री
अतिरिक्त कमिश्नर पुलिस ने बताया कि ऐसा नहीं कि जब किसी यात्री की जेब कटती है या किसी के साथ स्नैचिंग होती है तो किसी को पता नहीं चलता। रेलगाड़ी में मौजूद किसी न किसी यात्री की जेब कटने और स्नैचिंग के समय नजर पड़ जाती है लेकिन वे सब कुछ देखकर अलार्म नहीं बजाते। यात्रियों की इस मानसिकता का भी स्नैचर लाभ उठाते हैं। ऐसा ही वाक्या 8 जुलाई को हीरा नामक यात्री के साथ हुआ जो इंदौर से दिल्ली आया था। एक यात्री ने उसे इशारा कर बताया कि उसकी पैंट में कट लगा हुआ है लेकिन तब तक उसकी जेब से 65 हजार रुपए निकल चुके थे।

कानूनी पचड़े के कारण यात्री नहीं करते कम्पलेंट
7 महीनों में 35 केस तो वे दर्ज हुए हैं जिनमें रेलयात्रियों ने स्नैङ्क्षचग या जेब कटने के बाद आर.पी.एफ. के पास शिकायत दर्ज करवाई थी लेकिन पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के ज्यादातर यात्री इस कारण शिकायत दर्ज नहीं करवाते कि स्नैचर पकड़ा भी गया तो उन्हें अदालतों के चक्कर काटने पड़ेंगे इसलिए वे कानूनी पचड़े में नहीं पड़ते। यात्रियों की जेब तो कटती ही है मगर शिकायत दर्ज नहीं करवाने का खमियाजा कई बार यात्रियों को तब भुगतना पड़ता है जब स्नैचर/जेबकतरे द्वारा यात्री से चुराई गई कोई आइडैंटिटी किसी दूसरे जुर्म में पकड़ी जाती है। कमिश्रर पुलिस का कहना है कि यात्री को ऐसी घटना घटने पर तुरंत अपनी शिकायत दर्ज करवानी चाहिए ताकि बाद में उसे कोई बड़ी परेशानी न उठानी पड़े।

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