अंधविश्वास ने बुझा दिया घर का चिराग, एकादशी पर पत्नी और बेटी की चढ़ा दी बलि


कहते हैं जब अंधविशवास की आंधी चलती है, तो इंसान को दिखना बंद हो जाता है, दिमाग काम करना बंद कर देता हैं, वह वही करता है जो उसका दिल चाहता है और इसका अंत सिर्फ बर्बादी लेकर ही आता है। ऐसा एक मामला मढ़ी गांव में सामने आया है। जहां एक शख्स ने अपनी पत्नी और मासूम बेटे को निर्दयता से बलि चढ़ा दिया।

देश 21वीं सदी में जी रहा है, लेकिन कुछ ग्रामीण इलाके आज भी अंधविश्वास में घिरे हुए हैं। मामला अमरपाटन थाना क्षेत्र का है, जहां मनोज दहिया अपने परिवार के साथ रहता है। घटना के वक्त मनोज अपनी पत्नी और बच्चों के साथ घर पर था और माता पिता बाहर गए हुए थे। पांच अकटूबर को एकादशी थी। इस मौके पर उस हैवान ने निर्ममता से अपनी पत्नी और छह माह के मासूम बेटे की गंडासे से हत्या कर दी और शव देवता के चबूतरे पर चढ़ा दिया।

यही नहीं आरोपी ने अपनी दो और तीन साल की दोनों बेटियों को भी मारना चाहा। लेकिन मौका पाकर वे वहां से भाग गई और खुद को दूसरे कमरे में बंद कर लिया। उनके रोने की आवाज सुनकर आस पास के लोग इकट्ठे हो गए तो आरोपी मौका पाकर पीछे के दरवाजे से भाग गया।

सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी की तलाश शुरू कर दी। आरोपी के भाई का कहना है कि मनोज की मानसिक हालत ठीक नहीं है।

  • 1
    Share

LEAVE A REPLY