नाले से भी गंदा था यहां का पानी, एक संत ने साफ कर दी 160 किमी लंबी नदी


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कहते हैं कि 500 साल पहले होशियापुर में इसी नदी के किनारे सिखों के पहले गुरु नानक को अंतर्ज्ञान मिला था।

स्वच्छ भारत अभियान के तहत पंजाब से पर्यावरण कार्यकर्ता संत बलबीर सिंह सीचेवाल को दिल्ली में हुए समारोह में एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय आैर सूचना प्रसारण मंत्री वैंकेया नायडू ने सफाईगिरी अवॉर्ड दिया। इस अवॉर्ड के लिए देश भर से 14 लोगों को चुना गया था जिसमें पंजाब से अकेले संत सीचेवाल हैं। 160 किमी. लंबी काली बेईं नदी की सफाई करवाने के मॉडल को सरकार ने सराहा है। इसी मॉडल पर गंगा की सफाई में लागू किया गया है।

कैसे साफ करवा दी 160 किमी लंबी नदी…

– 40 गांव की नालियों का गंदा पानी लोग नदी में मिलाते थे। इससे यह एक गंदे नाले में बदल गई थी। नतीजतन आसपास के खेतों को पानी नहीं मिल पाता था।
– साल 2000 में पर्यावरण कार्यकर्ता बलबीर सिंह सीचेवाल ने इस नदी को साफ करने का काम शुरू किया था।
– उन्होंने अपने साथी और सहयोगी स्वयंसेवकों के साथ मिलकर सबसे पहले इसके तटों का निर्माण किया और नदी के किनारे-किनारे सड़कें बनाई।
– सीचेवाल ने लोगों के बीच जनजागृति अभियान चलाया। इसके तहत लोगों से अपना कूड़ा-करकट कहीं और डालने को कहा गया।
– नदी में मिलने वाले गंदे नालों का रुख मोड़ा गया और सबसे बड़ी बात, नदी के किनारे बसे लोगों को इसकी पवित्रता को लेकर जागरूक किया गया।
– जिस नदी के किनारे खड़े होने पर लोगों को नाक पर रुमाल रखना पड़ता था, अब उसी नदी के किनारे लोग पिकनिक मनाते हैं।

क्यों खास है ये नदी

– काली बेईं नदी कपूरथला जिले के सुल्तानपुर लोधी में 160 किलोमीटर क्षेत्र में बहती है।
– यह वही काली बेईं नदी है, जिसके किनारे 500 साल पहले गुरु नानक देव को अंतर्ज्ञान प्राप्त हुआ था और वे नानक से गुरु नानक के रूप में पहचाने जाने लगे थे।

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