भारत की श्रेयसी सिंह ने कॉमनवैल्थ गेम्स में जीता स्वर्ण पदक


भारत की श्रेयसी सिंह ने कॉमनवैल्थ गेम्स में महिलाओं की डबल ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर निशानेबाजी रेंज पर भारत का शानदार प्रदर्शन बरकरार रखा जबकि ओम मिठारवाल और अंकुर मित्तल ने कांस्य पदक अपने नाम किए। श्रेयसी ने फाइनल में 96 स्कोर करके ऑस्ट्रेलिया की एम्मा कॉक्स को हराया। शूटआफ में श्रेयसी ने दो और एम्मा ने एक निशाना लगाया। भारत की वर्षा वर्मन 86 के स्कोर के साथ चौथे स्थान पर रही। कांस्य पदक स्कॉटलैंड की लिंडा पीयरसन ने 87 अंकों के साथ जीता। श्रेयसी ने ग्लास्गो में चार साल पहले रजत पदक जीता था । वह तीन दौर के बाद दूसरे और वर्षा तीसरे स्थान पर थी । हाल ही में उसने 2017 राष्ट्रमंडल निशानेबाजी चैम्पियनशिप में भी रजत पदक जीता था। मित्तल ने पुरूष वर्ग में फाइनल्स में 53 का स्कोर किया। छह खिलाडिय़ों वाले फाइनल्स में शामिल एक दूसरे भारतीय निशानेबाज मोहम्मद असब चौथे स्थान पर रहे। उन्होंने ग्लास्गो में हुए पिछले कॉमनवैल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीता था। पिछले साल मॉस्को में विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक और दो आईएसएसएफ विश्व कप में एक रजत और एक स्वर्ण पदक जीतने वाले 26 वर्षीय मित्तल क्वालीफाइंड राउंड में 133 के स्कोर के साथ पांचवें स्थान पर रहे थे। मित्तल 2014 के राष्ट्रमंडल खेलों में पांचवें स्थान पर रहे थे।

मिठारवाल ने पुरूषों की 50 मीटर पिस्टल स्पर्धा में कांस्य पदक जीता जबकि जीतू राय आठवें स्थान पर रहे। युवा मिठारवाल ने इससे पहले 10 मीटर एयर पिस्टल में भी कांस्य पदक जीता था। वह आठ निशानेबाजों के फाइनल में 201.1 का स्कोर करके तीसरे स्थान पर रहे। दस मीटर एयर पिस्टल में स्वर्ण जीतने वाले जीतू राय 105.0 स्कोर करके एलिमिनेट होने वाले पहले निशानेबाज थे। पहले दौर के बाद छठे स्थान पर रहे मिठारवाल 93.7 स्कोर करके शीर्ष पर पहुंच गए। उन्होंने दो शाट तक बढ़त कायम रखी लेकिन रेपाचोली ने उन्हें दूसरे स्थान पर धकेल दिया। इसके बाद 9.8, 8.6, 10.2, 10.0 स्कोर करके वह दूसरे स्थान पर बने रहे। बाद में 7.2 और 7.6 के खराब स्कोर का उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ा और रजत की बजाय कांस्य पदक मिला।

श्रेयसी ने स्वर्ण जीतने के बाद कहा- मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। 2014 में मैने रजत जीता था और मैं बहुत दुखी थी कि स्वर्ण नहीं जीत सकी लेकिन इस बार मेरे पास मौका था। मैंने शूटआफ में संयम बनाए रखा और खुशी है कि शत प्रतिशत दे सकी। उसने कहा- एम्मा बेहतरीन निशानेबाज है और उसके खिलाफ जीतकर ज्यादा खुशी हुई। ईश्वर मेरे साथ थे और किस्मत ने मेरा साथ दिया। उसने आगे कहा- मेरे कोचों ने मेरी मदद की और परिवार भी यहां है। इस बार में स्वर्ण पदक जीतने के इरादे से ही उतरी थी। मैं फिर रजत लेकर नहीं जाना चाहती थी। श्रेयसी के दादा और पिता दिगविजय सिंह दोनों भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ के अध्यक्ष रह चुके है। उसने दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में भी भाग लिया लेकिन पदक नहीं जीत सकी थी। ग्लास्गो में रजत जीतने के बाद उसने 2014 इंचियोन एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता था।

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