आज है चैत्र नवरात्रि का पहला दिन, इस प्रकार करें मां शैलपुत्री की पूजा


आज चैत्र नवरात्र का पहला दिन है. चैत्र नवरात्र का आरम्भ होने से प्रतिपदा के दिन कलश स्थापना के साथ ही मां दुर्गा की पूजा शुरू की जाती है. पहले दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा होती है. शैलपुत्री मतलब पहाड़, पत्थर मतलब स्थिरता और पवित्रता. जीवन में स्थिरता तभी आती है, जब वह संपूर्ण होता है यानी स्वस्थ, सुखी और खशुहाल. चैत्र नवरात्र को वसंत या वासंतिक नवरात्रि भी कहा जाता है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार चैत्र नवरात्रि 8 दिनों की होगी, इस दौरान मां के नौ रूपों की पूजा होगी. जिनमें मां शैलपुत्री की पूजा सबसे पहले दिन होगी. बता दें चैत्र नवरात्रि से हिंदू नववर्ष का आरंभ भी माना जाता है.

कलश स्थापना- नवरात्र के पहले दिन घर की सफाई करें और जिस जगह पर माता की प्रतिमा स्थापित करना है वहां की सफाई कर चौकी स्थापित करें. इसके बाद मां दुर्गा के नाम की ज्योत जलाएं. एक कलश लें और उसमें मिट्टी डालें, फिर इसमें जौ के बीज छिड़क दें. एक अलग कलश लें और उस पर मौली बाधें और उस पर स्वास्तिक बनाएं. लोटे के ऊपर आमृपत्र रखें और उसमें एक नारियल रखकर चुनरी लपेट दें. अब कलश को जौ वाले मिट्टी के पात्र के बीचों-बीच रख दें और इसी के सामने ज्योत स्थापित कर दें.

पूजन विधि- सबसे पहले चौकी पर माता शैलपुत्री की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. इसके बाद गंगा जल से शुद्धिकरण करें. माता की चौकी स्थापित करें और उसी चौकी पर माता की प्रतिमा स्थापित करें. इसके बाद व्रत, पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा मां शैलपुत्री सहित समस्त स्थापित देवताओं की पूजा करें. माता का आह्वान करें और माता को वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, फल, पान, अर्पित करें. इसके बाद आरती कर पूजन संपन्न करें.

 


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