हड़ताल के कारण लुधियाना की औद्योगिक इकाइयों पर आर्थिक संकट, इंडस्ट्री का 3000 करोड़ का माल डम्प


लुधियाना – 20 जुलाई से शुरू हुई ट्रांसपोर्ट की हड़ताल आज 6 दिन बाद भी बदस्तूर जारी है। हड़ताल के कारण लुधियाना की औद्योगिक इकाइयों पर आर्थिक संकट छाने लगा है और इंडस्ट्रीज बंद होने की कगार पर पहुंच चुकी हैं। जहां माल अपने गंतव्य पर पहुंचने में असमर्थ है, वहीं उद्योगों में अभी कच्चे माल की कमी होनी शुरू हो गई है। ट्रकों की हड़ताल कारण दूसरे राज्यों से रॉ-मैटीरियल मंगवाने वाली कम्पनियां माल की आपूर्ति न होने से बंद हो चुकी हैं। कई स्टील फर्नेस इकाइयों ने स्क्रैप की आपूर्ति न होने के कारण अपनी प्रोडक्शन 2 शिफ्टों से घटाकर एक शिफ्ट में बदल दी है। मंडी गोबिंदगढ़ से स्टील की निकासी न होने से स्टील रोलिंग मिलें अपनी प्रोडक्शन बंद करने को मजबूर हैं। औद्योगिक नगरी लुधियाना से रोजाना 2000 ट्रक लगभग 20,000 टन माल दूसरे राज्यों को सप्लाई करते हैं और लगभग इतना ही कच्चा माल व अन्य सामान दूसरे राज्यों से लुधियाना में आता है।

अब तक करीब 3000 करोड़ रुपए का माल लुधियाना में अटक चुका है, जिससे कारोबारियों को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है। यूरो फोरज के एम.डी. अमित गोस्वामी का कहना है कि हड़ताल का बुरा असर एक्सपोर्ट पर भी पडऩा शुरू हो गया है। माल के समय पर न पहुंचने के कारण ऑर्डर रद्द होने का भी खतरा पैदा हो गया है।फैडरेशन ऑफ पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज संघ के अध्यक्ष बदीश जिंदल ने कहा कि अधिकतर लघु इकाइयां अपने पास 4 से 5 दिन की इन्वैंटरी ही रखती हैं। ऐसे में लगभग 60 प्रतिशत इकाइयां बंद होने की कगार पर पहुंच चुकी हैं। उन्होंने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल का शीघ्र हल करने की मांग की है। नॉर्थ इंडिया इंडक्शन फर्नेस संघ के प्रधान के.के. गर्ग ने कहा कि स्टील फर्नेस इंडस्ट्री की मुख्य खुराक स्क्रैप है और हड़ताली ट्रांसपोर्टरों द्वारा लुधियाना ड्राइपोर्ट से स्क्रैप न उठाने के कारण स्टील फर्नेसों को करोड़ों रुपए का डैमरेज पड़ रहा है।

सरकार ट्रांसपोर्टरों की मांगों के प्रति गम्भीर नहीं
ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष चरण सिंह लोहारा ने कहा कि सरकार ट्रांसपोर्टरों की मांगों के प्रति गम्भीर नहीं है। उन्होंने कहा कि ट्रांसपोर्टरों की नितिन गडकरी के साथ वर्ष 2015 की मीटिंग की वीडियो को वायरल कर हड़ताल खत्म करने का मैसेज फैलाया जा रहा है, जो सरासर गलत है। जालंधर ट्रांसपोर्ट संघ के प्रधान जगजीत कम्बोज व उपाध्यक्ष राजेंद्र शर्मा ने कहा कि डीजल को जी.एस.टी. के दायरे में लाया जाए। ट्रांसपोर्टर पहले ही डीजल का भारी टैक्स दे रहे हैं, जिसमें रोड टैक्स भी शामिल है। सरकार ने कई नए आयकर प्रावधान लागू करके ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री को मुश्किल में डाल दिया है। ऐसे में सरकार को ट्रांसपोर्टरों पर एक टैक्स स्लैब लागू करनी चाहिए।

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