जेट एयरवेज में हुए एयर प्रेशर हादसे के शिकार दो यात्रियों ने खोई सुनने की शक्ति


लगभग दो महीने पहले जेट एयरवेज की एक फ्लाइट को इमरजेंसी लैंडिग करानी पड़ी थी। प्लेन में बैठे 166 यात्रियों में से 30 के नाक और कान से खून निकलने लगा था। अब दो महीने बाद इन 166 यात्रियों में से 2 को सुनने में परेशानी हो रही है। इस हादसे में शिकार हुए एक शख्स की सुनने की शक्ति समाप्त हो गई है। हादसा प्लेन के केबिन क्रू की लापरवाही के कारण हुआ था। क्रू मेंबर केबिन प्रेशर रेगुलेट करना भूल गए थे,जिससे हवा का दबाव बढ़ने के कारण यात्रियों के नाम और कान से निकलने लगा।

हादसे का शिकार हुए यात्रियों में से एक मुकेश शर्मा भी थे, जो अब अपनी सुनने की शक्ति खो चुके हैं। जयपुर के अस्पताल में उनका ऑडियोमेट्री टेस्ट हुआ। टेस्ट में पता चला कि उन्होंने हमेशा के लिए अपनी सुनने की शक्ति खो दी है। डॉक्टर ने बताया कि शर्मा को बारोट्रॉमा से गुजरना पड़ा। उनकी कान और गले को जोड़ने वाली यूस्टेचियन ट्यूब में ब्लॉकेज हो गया है, जिस कारण उनकी सुनने की शक्ति हमेशा के लिए चली गई है।

शर्मा पुर्तगाल में रिसर्च स्कॉलर के तौर पर काम कर रहे थे, लेकिन बीमारी के चलते उन्हें अपनी नौकरी भी छोड़नी पड़ी। शर्मा का इलाज कर रहे असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पवन सिंघल ने बताया कि मुकेश शर्मा और अंकुर काला, दोनों ही बैरोट्रॉमा से पीड़ित हैं। इसके अलावा अंदर खून बहने और सूजन भी इसका कारण है। डॉक्टर ने इसका इलाज सर्जरी और इंप्लांट बताया है। मुकेश शर्मा ने बताया कि इस एक्सीडेंट और निजी कारणों से उन्हें अपनी नौकरी भी छोड़नी पड़ी। उन्होंने कहा कि इस इंप्लांट में करीब 5-6 लाख रुपए का खर्चा आएगा और सर्जरी-दवाइयों के पैसे अलग। दूसरे पीड़ित अंकुर काला ने कहा है कि वो एयरलाइन्स के खिलाफ कंज्यूमर कोर्ट में जाने की तैयारी कर रहे हैं। शर्मा बाकी पीड़ितों के साथ जेट एयरवेज के कारण हुए शारीरिक और मनोवैज्ञानिक तनाव के खिलाफ कंज्यूमर कोर्ट में मामला दर्ज करने के लिए कागजी तैयारी कर रहे हैं।

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