VVIP हेलीकॉप्टर सौदा – मिशेल के पत्र से हुआ खुलासा, मनमोहन सिंह पर था कांग्रेस का दबाव


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अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआइपी हेलीकॉप्टर सौदा मामले में कथित बिचौलिये क्रिश्चियन मिशेल का एक सनसनीखेज पत्र सामने आया है जो कई चीजें उजागर करता है. यह पत्र फिनमैकेनिका कंपनी के सीईओ जुगेपी ओरसी को लिखा गया था. पत्र में क्रिश्चियन मिशेल ने बताया है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर दबाव बनाया था. इसके अलावा इस पत्र में ये भी संकेत मिलते हैं कि मिशेल को इस सौदे से जुड़ी सभी जानकारियां संबंधित मंत्रालयों से मिल रही थीं.

28 अगस्त, 2009 को लिखे इस पत्र के मुताबिक, मिशेल को अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे से जुड़ी सभी जानकारियां पीएमओ, रक्षा मंत्रालय समेत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से मिल रही थीं. इतना ही नहीं उसे तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन की मुलाकात और उनके बीच हुई बातचीत के बारे में भी पता था. ओरसी को लिखे इस पत्र में मिशेल ने दावा किया था कि इस मुद्दे पर सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी की जो बैठक होने वाली है उसके बारे में उसे जानकारी है.

22 दिसंबर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 3600 करोड़ रुपये के अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे मामले के कथित बिचौलिये क्रिश्चियन मिशेल को शनिवार को गिरफ्तार किया था. मिशेल को विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार के समक्ष पेश किया गया जहां ईडी ने उनसे पूछताछ के लिये 15 दिन की हिरासत मांगी. अदालत ने ईडी को ब्रिटिश नागरिक मिशेल से अदालत कक्ष में 15 मिनट पूछताछ करने की अनुमति दी. इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया.

manmohan singh

ईडी ने धन शोधन के एक मामले में मिशेल की अलग से गिरफ्तारी की इजाजत मांगी थी. ईडी ने कहा था कि सीबीआई और उसके द्वारा धन के आवागमन की जांच की जा रही है लेकिन धन की मात्रा को लेकर दोनों एजेंसियों में अंतर है. ईडी ने कहा, ‘हम दो अलग अलग एजेंसियां हैं. कानून के दायरे में रहते हुए संयुक्त जांच असंभव है. हमें खुद से पूरे मामले पर गौर करना होगा.’ एजेंसी ने कहा कि उसे अपराध से जुड़े घटनाक्रम तथा उस धन से खरीदी गई संपत्ति के धन शोधन वाले पहलू पर जांच करनी है. ईडी ने कहा, ‘हमें तीन करोड़ यूरो की जांच की जानकारी है. सीबीआई की जांच 3.7 करोड़ यूरो से अधिक की है. हमें यह अंतर दूर करना है.’

एजेंसी ने कहा कि अपराध के धन से दो संपत्तियां खरीदी गईं और इसलिए यह पूरी तरह से धन शोधन के दायरे में आता है. एजेंसी ने कहा कि धन का इस्तेमाल हुआ और यह धन हवाला के जरिये आया. यह आधिकारिक रास्ते से नहीं आया. इसकी जांच होनी चाहिए और उससे इस संबंध में पूछताछ की जानी है. सहआरोपियों से सामना कराना होगा. उसे यूएई में गिरफ्तार किया गया था और प्रत्यर्पण करके चार दिसंबर को भारत लाया गया था. अगले दिन उसे अदालत के समक्ष पेश किया गया जहां अदालत ने उसे पांच दिन के लिये सीबीआई की हिरासत में भेज दिया. उसकी हिरासत अवधि बाद में पांच दिन के लिये बढ़ा दी गई. इसके बाद चार दिन के लिये उसकी हिरासत और बढ़ा दी गई.

अदालत ने मिशेल की जमानत याचिका पर फैसला 19 दिसम्बर को सुरक्षित रख लिया था और उसे 28 दिसम्बर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. मिशेल के वकील अल्जो के जोसफ ने उसकी 15 दिन की हिरासत का विरोध करते हुए कहा कि सीबीआई द्वारा उसे लंबे समय तक हिरासत में रखा गया और अब उसे ईडी की हिरासत में रखने से ‘उसके मौलिक अधिकार प्रभावित होंगे.’ मिशेल मामले में शामिल तीन बिचौलियों में से एक है. ईडी और सीबीआई इनकी संलिप्ता के संदर्भ में जांच कर रही है. दो अन्य बिचौलिये गुइदो हाश्खे और कार्लो गेरोसा हैं.

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